ममता बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने की इजाजत

कलकता हाईकोर्ट ने उस अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है जिसके तहत तृणमूल को पार्टी के तीन बैंक खातों का संचालन करने की अनुमति मिली हुई है।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि हाई कोर्ट का 9 जुलाई का अंतरिम आदेश 29 जनवरी, 2027 तक या अगले आदेश जारी होने तक प्रभावी रहेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर में होनी तय हुई है।

अदालत ने आदेश दिया कि विशेष अधिकारी द्वारा आज सौंपी गई रिपोर्ट को कल तक विरोधी पक्ष के साथ साझा किया जाना चाहिए। यदि इस बीच चुनाव आयोग कोई निर्देश जारी करता है, तो मामले को अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है।

कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी ने आज इस मामले पर एक रिपोर्ट पेश की। पुलिस की ओर से भी एक रिपोर्ट सौंपी गई। पुलिस ने तर्क दिया कि 17 सितंबर को आए चुनाव आयोग के आदेश को देखते हुए इस मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए।

पुलिस का कहना था कि चूंकि तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट को पार्टी के नाम “ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” या “घास-फूल” (घासफूस) प्रतीक चिन्ह का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए किसी भी गुट को एचडीएफसी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम पर मौजूद तीन खातों का संचालन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि पिछले आदेश में कालीघाट-तृणमूल (पार्टी को फ़िलहाल इसी नाम का उपयोग करने की अनुमति मिली है) को पार्टी का असली गुट माना गया था। इसलिए, जब तक चुनाव आयोग कोई अंतिम फैसला नहीं ले लेता, तब तक पार्टी के दो शीर्ष पदाधिकारियों को विशेष अधिकारी की मंजूरी से इन तीन खातों से पैसे निकालने की अनुमति है। दोनों गुटों को इन खातों का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी गई थी। जज ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा पार्टी सिंबल को फ्रीज करने के अंतरिम आदेश का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि पार्टी से उसके बैंक खातों को संचालित करने का अधिकार भी छिन गया है।

जज ने आगे कहा कि चुनाव आयोग का यह निर्देश विशेष रूप से उपचुनावों को ध्यान में रखकर जारी किया गया था। आयोग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1960 के तहत बाद में इस मामले पर अंतिम फैसला करेगा. चुनाव आयोग द्वारा लिया गया निर्णय केवल पार्टी सिंबल के इस्तेमाल से संबंधित है। आयोग ने अभी तक संपत्तियों या प्रॉपर्टी को लेकर कोई फैसला नहीं किया है।

सुनवाई के दौरान, राज्य के वकील राजदीप मजूमदार ने कहा, “चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के सिंबल (चुनाव चिह्न) को फ्रीज करने का आदेश दिया था। यह एक अंतरिम आदेश के रूप में जारी किया गया था। ऐसी परिस्थितियों में, किसी को भी इन बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”

इसके जवाब में तृणमूल कांग्रेस के वकील शोएब आलम ने तर्क दिया, “इसी बेंच ने 9 जुलाई को एक आदेश जारी किया था। जब उसे बाद में देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी गई, तो सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। चुनाव आयोग ने उपचुनावों से पहले 17 सितंबर को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के सिंबल को फ्रीज किया है, लेकिन यह आयोग का अंतिम फैसला नहीं है। तृणमूल कांग्रेस न तो कोई सोसायटी है और न ही कोई को-ऑपरेटिव”

उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान मामला एचडीएफसी बैंक के तीन खातों से जुड़ा है, जिसके संबंध में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले 9 जुलाई को एक अंतरिम आदेश जारी किया था। हालांकि इसके बाद छह अन्य बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया था, लेकिन अदालत ने उन्हें लेकर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया था। तृणमूल कांग्रेस एक राजनीतिक दल है जिसके रोज़मर्रा के संचालन के खर्चे होते हैं, और इस तथ्य से इस अदालत को पहले ही अवगत कराया जा चुका है।”

इसके जवाब में जज ने कहा, “आपके तर्क के अनुसार, भले ही पार्टी के पास उसका सिंबल न हो, फिर भी खर्चों के लिए खाते चालू रहने चाहिए। हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट के 9 जुलाई के आदेश में यह शर्त रखी गई थी कि यह मामला चुनाव आयोग के फैसले पर निर्भर करेगा और इस बिंदु को कालीघाट तृणमूल ने अदालत में चुनौती नहीं दी थी।”

जज के इस तर्क को सुनने के बाद, तृणमूल कांग्रेस के वकील ने अपनी बात दोहराते हुए कहा, “लेकिन चुनाव आयोग अभी तक किसी अंतिम फैसले पर नहीं पहुंचा है।”

(जनचौक ब्यूरो)

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